मन की सोच – सोनम
23 February 2010
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This is a guest post by my wife. She chooses to put a poem written by her -
एक दिन अचानक यूँ ही सोचा मैंने
काश कही ऐसा होता
इस दुनिया में कोई गम ना होता
कोई प्यासा ना होता
कोई तरसा ना होता
हर होठ पर शबनम और हंसी होती
इस दुनिया में सिर्फ ख़ुशी होती
हर दिल में सिर्फ मोहब्बत होती
नफरत की कोई जगह ना होती;
फिर तभी सोचा मैंने
अगर कही ऐसा होता
इस दुनिया में कोई गम ना होता
कोई प्यासा ना होता
कोई तरसा ना होता
तो ख़ुशी की कोई कीमत ना होती
हसी का कोई मोल ना होता
गम भी ख़ुशी का हिस्सा है
सारा किस्मत का किस्सा है
किसी को पहले गम
किसी को पहले ख़ुशी मिलती है
दुनिया में हर चेहरे को एक हसी मिलती है !
-Sonam Verma

















